सुखते खेत टूटती उम्मीद। किसान अपनी फसल बचाने के लिए कर रहे प्रयास।sukha khet

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मैनपुर। पिछले दो हफ्तों से गरियाबंद जिले में बारिश ना होने से किसान चिंतित हो रहे हैं छत्तीसगढ़ में खंड वृष्टि अर्थात कहीं वर्षा हो रही है तो कहीं सूखा पड़ रही है ऐसे में किसान अपने सूखे खेत को बर्बाद होने से बचाने के लिए कई उपाय कर रहे हैं।
जिन किसानों के पास सिंचाई के संसाधन है वह सिंचाई कर पा रहे हैं अथवा जिन किसानों का खेत नदी नालों के किनारे स्थित है वह पम्प के माध्यम से सिंचाई कर रहे हैैं परंतु अधिकतर किसानों के पास सिंचाई के साधन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आखिर किसान करे तो क्या करें सब ऊपर वाले के भरोसे निर्भर रह रहे हैं।
खेत में खड़ी फसल बर्बाद होने की कगार पर आखरी है जमीन कड़ी होने की वजह से लहलहाती फसल अब कमजोर होकर पीली पड़ चुकी है क्षेत्र की किसानों की स्थिति "अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत" वाली कहावत सी हो गई है क्योंकि समय में वर्षा नहीं होने के कारण फसल की स्थिति खराब हो चुकी है बाद में वर्षा होने पर भी वह फसल किसान को उपज नहीं दे सकती। देश-दुनिया का पेट पालने वाला किसान मौसम की मार के वजह से गरीब का गरीब बना रह जाता है।